Navratri Pooja Vidhi Hindi & English, Durga Maa Aarti, Mantra, Poojan Subh Muhurt, Mantra

By | September 30, 2016

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Information About Navratri Pooja Vidhi In Hindi & English

Navratri fasting is for 9 days. many people keep fast on all days (which is best). but some people keep fast on first and last day. some people keep fast on last two days. some people try that one member of the family keep fast on everyday, so that someone from the family has kept fast during navratri. since onion and garlics are not eaten so you can use them before the navratri begins. at home, we don’t use onions and garlic in food no matter whether other members of family are fasting on that day or not. you can refer this post on food allowed for navratri fast or vrat. in this post, we will be sharing how we do navratri pooja in north indian style. during navratri we invoke the goddess in our home. so its best to clean the house and also your pooja room. if you have ganga water then sprinkle it in all rooms. navratri is celebrated all over india with different forms. e.g. in north india people keep fast. whereas in south india they don’t keep fast. in bengal reason it is celebrated as durga pooja. this year navaratri begins on 1 October 2016 and ends on 9 October, 2016. there is no fix rule and it varies from community to community. some people eat only one flour based diet in a day and rest of the day they take milk, tea, fruits etc. those who can not go for such strict diet take 2 flour based meals. in my place, we also buy ‘seel ki patti or laddu’ – made from popped amaranth seeds, from the grocery stores and have it during the fasting. normally, there is always relaxation for old or sick people, even for nursing mothers or for those who can not follow rigorous fasting rules. but non-veg food and alcohol should not be allowed in the house till navratri is over. no matter you are keeping navratri fast or not. since that day small girls are in demand. they have to go to many houses. they simply cannot eat all these prasad in one sitting. so don’t force them, if that is the case. but just make sure that the girls eat part of poori, chana and halwa before going to another house for pooja. just one bite is also enough and take blessings from them which they will give by gently patting on your head.

नवरात्री पूजा विधि

शक्ति के लिए देवी आराधना की सुगमता का कारण मां की करुणा, दया, स्नेह का भाव किसी भी भक्त पर सहज ही हो जाता है। ये कभी भी अपने बच्चे (भक्त) को किसी भी तरह से अक्षम या दुखी नहीं देख सकती है। उनका आशीर्वाद भी इस तरह मिलता है, जिससे साधक को किसी अन्य की सहायता की आवश्यकता नहीं पड़ती है। वह स्वयं सर्वशक्तिमान हो जाता है। इस साधना काल में आसन पर बैठना चाहिए तथा पूर्ण होने के पूर्व उसका त्याग किसी भी स्थिति में नहीं करना चाहिए। अर्चन के उपयोग में प्रयुक्त सामग्री अर्चन उपरांत किसी साधन, ब्राह्मण, मंदिर में देना चाहिए। कुंकुम से भी अर्चन किए जा सकते हैं। इसमें नमः के पश्चात बहुत थोड़ा कुंकुम देवी पर अनामिका-मध्यमा व अंगूठे का उपयोग करके चुटकी से चढ़ाना चाहिए।अर्चन की सामग्री प्रत्येक नाम के पश्चात, प्रत्येक व्यक्ति को अर्पित करना चाहिए। अर्चन के पूर्व पुष्प, धूप, दीपक व नैवेद्य लगाना चाहिए। दीपक इस तरह होना चाहिए कि पूरी अर्चन प्रक्रिया तक प्रज्वलित रहे। अर्चनकर्ता को स्नानादि आदि से शुद्ध होकर धुले कपड़े पहनकर मौन रहकर अर्चन करना चाहिए।

नवरात्री स्थापना सुबह मुहूर्त

इस बार शारदीय नवरात्र 01 अक्टूबर 2016 से शुरु होंगे। नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। 01 अक्टूबर को सुबह 06:17 मिनट से लेकर 07:29 तक का समय कलश स्थापना के लिए शुभ है। नवरात्र व्रत की शुरुआत प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना से की जाती है।

नवरात्री पूजन सामग्री

  • माँ दुर्गा की फोटो या मूर्ति
  • दुप्पटा और साड़ी
  • दुर्गा सप्तशती किताब
  • गंगा जल एवम कलश
  • आम की पत्तिया
  • दुब और घास
  • चन्दन की लकड़ी
  • नारियल
  • तिलक के लिए रोली
  • मोली
  • चावल
  • पान
  • सुपारी
  • लौंग
  • इलायची
  • कुमकुम
  • गुलाल

नवरात्री पूजन विधि

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नवरात्री दुर्गा माँ आरती

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी तुम को निस दिन ध्यावत
मैयाजी को निस दिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवजी ।| जय अम्बे गौरी ॥

माँग सिन्दूर विराजत टीको मृग मद को |मैया टीको मृगमद को
उज्ज्वल से दो नैना चन्द्रवदन नीको|| जय अम्बे गौरी ॥

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर साजे| मैया रक्ताम्बर साजे
रक्त पुष्प गले माला कण्ठ हार साजे|| जय अम्बे गौरी ॥

केहरि वाहन राजत खड्ग कृपाण धारी| मैया खड्ग कृपाण धारी
सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुख हारी|| जय अम्बे गौरी ॥

कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती| मैया नासाग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर सम राजत ज्योति|| जय अम्बे गौरी ॥

शम्भु निशम्भु बिडारे महिषासुर घाती| मैया महिषासुर घाती
धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती|| जय अम्बे गौरी ॥

चण्ड मुण्ड शोणित बीज हरे| मैया शोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोउ मारे सुर भयहीन करे|| जय अम्बे गौरी ॥

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी| मैया तुम कमला रानी
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी|| जय अम्बे गौरी ॥

चौंसठ योगिन गावत नृत्य करत भैरों| मैया नृत्य करत भैरों
बाजत ताल मृदंग और बाजत डमरू|| जय अम्बे गौरी ॥

तुम हो जग की माता तुम ही हो भर्ता| मैया तुम ही हो भर्ता
भक्तन की दुख हर्ता सुख सम्पति कर्ता|| जय अम्बे गौरी ॥

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी| मैया वर मुद्रा धारी
मन वाँछित फल पावत देवता नर नारी|| जय अम्बे गौरी ॥

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती| मैया अगर कपूर बाती
माल केतु में राजत कोटि रतन ज्योती|| बोलो जय अम्बे गौरी ॥

माँ अम्बे की आरती जो कोई नर गावे| मैया जो कोई नर गावे
कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे|| जय अम्बे गौरी ॥

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